गठिया

यह एक स्वप्रतिरक्षित बिमारी (आटोइम्यून) है। जिसका परिणाम लचीला जोड़ो में दीर्ध प्रजव्लन है। अगर सही इलाज नही किया धीरे धीरे रोग पुराना होने के कारण जोड़ो का कार्य और लचीलापन नुकसान होता है और प्रभावित जोड़ निर्योग्यकारी और पीड़ादायक होता है। इस बीमारी से जोड़ों में स्थाई विकृति हो जाती है और हमेशा के लिए इनका काम करना बन्द हो जाता है।

लक्षण

– छोटे और बड़े कई सारे जोड़ों में एक साथ तकलीफ की शिकायत होना। – जोड़ों में सूजन, दर्द, लाली और हिलाने-डुलाने में समस्या के कारण पर एकदम ध्यान जाता है। – समय और मौसम के अनुसार इसकी गम्भीरता में फर्क पड़ना। यह एक चिरकारी समस्या होती है और कई सालों, दशकों और अक्सर उम्र भर तक भी चल सकती है।

कारण

बीमारी के कारण के बारे में अभी तक कुछ स्पष्ट रूप से पता नहीं है।  आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।  सिर्फ कुछ शोथविरोधक दवाएँ दी जाती हैं जिनका सिर्फ कुछ देर असर रहता है।

कारण

। – यह बीमारी पहले पहले तब दिखाई देती है जब व्यक्ति उम्र के दूसरे या तीसरे दशक में होता है। – इस बीमारी का स्वरूप मौसम के अनुसार कम या ज्यादा होता है।